श्री १००८ आदिनाथ भगवान

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म चैत्र कृष्ण नौवीं के दिन सूर्योदय के समय हुआ। उन्हें ऋषभनाथ भी कहा जाता है। उन्हें जन्म से ही सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान था। वे समस्त कलाओं के ज्ञाता और सरस्वती के स्वामी थे।

श्री कुंदकुंद आचार्य देव"

श्रुतधर आचार्य की परम्परा में कुन्दकुन्दाचार्य की स्थान महत्वपूर्ण है। इनकी गणना ऎसे युगसंस्थापक आचार्यों के रूप में की गयी है, जिनके नाम से उत्तरवरर्त्ती परम्परा कुन्दकुन्द-आम्नाय के नाम से प्रसिद्ध हुई है।

पुज्य गुरुदेव श्री

Kanji Swami was a teacher of Jainism and deeply influenced by the works of Pandit Todarmal and by the Samayasāra of Kundakunda. He was given the title of 'Kohinoor of Kathiawad' by the people who were influenced by his religious teachings and philosophy.

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Universal Way of Life for living entities A Brief History